पितृ पक्ष समाप्त होने जा रहा है। इसके समाप्त होते ही नवरात्रों की धूम और चकाचौंध दिखाई देने लगेगी। मां दुर्गा को समर्पित शारदीय नवरात्रि 1 अक्टूबर, 2016 से प्रारंभ होने जा रहे हैं जो 10 अक्टूबर तक चलेंगे। इस बार नवरात्रि 9 दिन ना होकर 10 दिन के हैं, जो कि धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से सकारात्मक रूप से फलदायी माना जा रहा है। 10 दिन की नवरात्री का यह संयोग 18 बरस के बाद आ रहा है। विजयादशमी इस बार 11 वें दिन होगी।
नवरात्रि का त्यौहार वर्ष में दो बार आता है। गर्मियों में आने वाले नवरात्रि को चैत्र के नवरात्रि कहा जाता है और सर्दियों में आने वाले नवरात्रि शक्ति शारदीय नवरात्रि कहे जाते हैं। शारदीय नवरात्रि इस बात की आहट देते हैं कि अब ठिठुरन का मौसम आने वाला है। हिन्दू धर्म में बिना शुभ मुहुर्त के कोई व्रत, त्यौहार या उत्सव नहीं मनाया जाता। कुछ ऐसे ही नवरात्रि का शुभारंभ जिसमें घट स्थापना करना सबसे प्रमुख है के लिए शुभ मुहूर्त का ध्यान रखना आवश्यक है, क्योंकि कलश की स्थापना अगर सही समय पर नहीं होती तो ये अनुकूल फल प्रदान नहीं करता।
जानकारों के अनुसार शारदीय नवरात्रि 2016 के लिए कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त 1 अक्टूबर सुबह 6 बजकर 20 मिनट से लेकर 7 बजकर 30 मिनट तक रहेगा। इस दौरान जातकों को अपने घर या मंदिर दुर्गा पूजा के लिए कलश की स्थापना कर लेनी चाहिए। हिन्दू धर्म ग्रंथों में कलश की स्थापना को इसलिए भी महत्वपूर्ण कहा गया है क्योंकि यह कलश खुशहाली और समृद्धि के साथ-साथ धन-वैभव का भी प्रतीक है। कलश के मुख पर भगवान विष्णु, कंठ में महादेव और मूल में ब्रह्मा जी का वास माना गया है, साथ ही यह भी माना जाता है कि कलश के मध्य में देवियां विराज करती हैं। इसलिए इस कलश की स्थापना के लिए सभी जरूरी विधि-विधान को पूरा करना आवश्यक है।

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